Dummy

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विलोबेंड नाम के एक छोटे से शहर में एक बहुत पुरानी घड़ी मीनार थी। लोग उस पर भरोसा तो करते थे, लेकिन अब उस पर ध्यान देना भूल चुके थे। घड़ी हर दिन समय बताती रहती थी और लोग अपनी ज़िंदगी की भागदौड़ में लगे रहते थे।

बारह साल का आरव बाकी बच्चों से थोड़ा अलग था। वह चीज़ों को ध्यान से देखता और सुनता था। एक बरसाती शाम, जब लोग बाज़ार से जल्दी-जल्दी घर लौट रहे थे, आरव ने देखा कि घड़ी की सुइयाँ उलटी दिशा में चल रही हैं। टिक… टॉक… टिक। यह सामान्य नहीं था।

अचानक बिजली चमकी और घड़ी मीनार का दरवाज़ा, जो वर्षों से बंद था, अपने आप खुल गया। थोड़ी हिचक के बाद आरव अंदर चला गया। उसके पीछे दरवाज़ा ज़ोर से बंद हो गया। अंदर गहरा अँधेरा था और हवा में धूल के कण तैर रहे थे। तभी लकड़ी की सीढ़ियाँ घूमने लगीं और आरव को ऊपर की ओर खींच ले गईं।

ऊपर पहुँचकर वह एक अजीब लेकिन सुंदर कमरे में पहुँचा। हवा में सुनहरी रेत बह रही थी और बड़े-बड़े पहिए तैर रहे थे। तभी एक गहरी आवाज़ गूंजी। सामने समय का संरक्षक खड़ा था—लंबा, तेजस्वी और रहस्यमय।

संरक्षक ने बताया कि समय टूट रहा है क्योंकि लोग सुनना भूल गए हैं। वे हमेशा जल्दबाज़ी में रहते हैं और एक-दूसरे की बात नहीं समझते। इतना कहते ही पहिए टूटने लगे और आरव खुद को समय के भीतर गिरता हुआ महसूस करने लगा।

पल भर में वह एक घने जंगल में था, जहाँ विशाल डायनासोर घूम रहे थे। डर के बीच उसने एक बच्चे डायनासोर के रोने की आवाज़ सुनी। आरव ने उस आवाज़ का पीछा किया और बच्चे को सुरक्षित जगह पहुँचा दिया। तभी सब कुछ चमक उठा और वह दृश्य गायब हो गया।

अगली ही पल वह भविष्य के विलोबेंड में था। वहाँ न कोई आवाज़ थी, न हँसी। लोग मूर्तियों की तरह खड़े थे और उनके बीच काले साए घूम रहे थे—छाया सेकंड, जो अव्यवस्था और खाली खामोशी से ताकत पाते थे। आरव समझ गया कि बिना सुने की गई खामोशी सिर्फ़ खालीपन होती है।

जब साए उसकी ओर बढ़े, तो आरव भागा नहीं। उसने आँखें बंद कीं और अपने दिल की धड़कन, साँसों और हवा की आवाज़ को ध्यान से सुना। उसके भीतर से तेज़ रोशनी निकली और साए गायब हो गए। शहर फिर से जीवित हो उठा।

अचानक आरव फिर उसी चमकते कमरे में था। समय का संरक्षक उसके सामने खड़ा था। उसने आरव को दो विकल्प दिए—सब कुछ भूल जाना या समय की रक्षा करना। आरव ने बिना देर किए समय की रक्षा करने का निर्णय लिया।

संरक्षक ने उसकी कलाई पर घड़ी का एक चमकता निशान बना दिया।

अगली ही पल आरव खुद को घड़ी मीनार के नीचे पाया। बाज़ार पहले की तरह चल रहा था, लेकिन सब कुछ थोड़ा शांत और बेहतर लग रहा था। आरव ने अपनी कलाई देखी—निशान अब भी मौजूद था।

ऊपर, घड़ी की सुइयाँ हल्की रोशनी में चमक रही थीं, जैसे अगली चुनौती के लिए तैयार हों।

और आरव जानता था—यह बस शुरुआत थी।

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